॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ • शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
🪔॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥ • प्रामाणिक आरती संग्रह

सम्पूर्ण आरती संग्रह (Aarti Sangrah in Hindi)

सनातन धर्म के 16 परम पावन देवी-देवताओं की प्रामाणिक आरतियां। वरिष्ठजनों एवं आदरणीय माता-पिताओं के लिए विशेष रूप से बड़े, शुद्ध और स्पष्ट अक्षरों में तैयार की गई हैं ताकि बिना किसी कठिनाई के नित्य आरती का पाठ किया जा सके।

✓ 16 प्रमुख देवी-देवता✓ बड़े व स्पष्ट अक्षर (Senior-Friendly)✓ सरल हिन्दी भावार्थ सहित✓ सजीव वर्चुअल दर्शन सुविधा
🐘बुधवार

श्री गणेश जी की आरती

Ganesh Ji Ki Aarti (Jai Ganesh Deva)

"जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा"

🐒मंगलवार एवं शनिवार

श्री हनुमान जी की आरती

Hanuman Ji Ki Aarti (Aarti Kije Hanuman Lala Ki)

"आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की"

🔱सोमवार एवं त्रयोदशी

भगवान शिव जी की आरती

Shiv Ji Ki Aarti (Om Jai Shiv Omkara)

"ॐ जय शिव ओंकारा, हर ॐ शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥"

🪷शुक्रवार एवं दीपावली

माता महालक्ष्मी जी की आरती

Lakshmi Mata Ki Aarti (Om Jai Lakshmi Mata)

"ॐ जय लक्ष्मी माता, तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥"

🏹रविवार एवं रामनवमी

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी की आरती

Shri Ram Chandra Kripalu Bhajuman / Shri Ram Aarti

"श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्। नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुख कर कञ्ज पद कञ्जारुणम्॥"

🦚बुधवार, गुरुवार एवं जन्माष्टमी

भगवान श्री कृष्ण जी की आरती

Krishna Ji Ki Aarti (Aarti Kunj Bihari Ki)

"आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला॥"

🦁शुक्रवार, मंगलवार एवं नवरात्रि

माँ दुर्गा / अम्बे जी की आरती

Durga Maa Ki Aarti (Jai Ambe Gauri)

"जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥"

☀️गुरुवार एवं एकादशी

भगवान श्री जगदीश जी की आरती

Jagdish Ji Ki Aarti (Om Jai Jagdish Hare)

"ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥"

🪕बसंत पंचमी एवं गुरुवार

विद्या दायिनी माँ सरस्वती की आरती

Saraswati Mata Ki Aarti (Om Jai Saraswati Mata)

"जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥"

📜पूर्णिमा एवं गुरुवार

भगवान श्री सत्यनारायण जी की आरती

Satyanarayan Ji Ki Aarti (Jai Lakshmi Ramana)

"जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥"

🕊️गुरुवार

शिरडी साईं बाबा की आरती

Sai Baba Ki Aarti (Aarti Sai Baba)

"आरती साईं बाबा, सौख्यदातार जीवा। चरण रजातली, द्यावा दासां विसावा॥"

👑एकादशी एवं द्वादशी

खाटू श्याम जी की आरती

Khatu Shyam Ji Ki Aarti (Om Jai Shri Shyam Hare)

"ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजे, अनुपम रूप धरे॥"

⚔️शनिवार, मंगलवार एवं अमावस्या

महाकाली माँ की आरती

Kali Mata Ki Aarti (Mangal Ki Seva)

"मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥"

🌊गंगा दशहरा एवं पूर्णिमा

मोक्षदायिनी माँ गंगा की आरती

Ganga Mata Ki Aarti (Om Jai Gange Mata)

"ॐ जय गङ्गे माता, श्री जय गङ्गे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥"

🕉️रविवार एवं गायत्री जयंती

वेदमाता गायत्री जी की आरती

Gayatri Mata Ki Aarti (Jayati Jayati Gayatri Mata)

"जयति जयति गायत्री माता, जयति जयति गायत्री माता। आदि शक्ति तुम अलख निरंजन, जग पालनकर्ता॥"

☀️रविवार एवं छठ पूजा

भगवान सूर्य देव जी की आरती

Surya Dev Ki Aarti (Jai Kashyap Nandan)

"जय कश्यप नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन तिमिर निकन्दन, भक्त हृदय चन्दन॥"

📅

वार अनुसार दैनिक आरती एवं इष्टदेव पूजन सारणी (Daily Worship Guide)

शास्त्रों के अनुसार सप्ताह के प्रत्येक दिन विशेष ग्रह एवं देवता की पूजा का विधान है। अपनी नित्य पूजा में वार अनुसार इस क्रम का पालन करें:

वार (Day)इष्टदेव (Deity)प्रमुख आरतीदर्शन एवं पाठ
🔱सोमवार (Monday)भगवान शिव जीशिव जी की आरती (ॐ जय शिव ओंकारा)पाठ करें →
🐒मंगलवार (Tuesday)श्री हनुमान जी एवं माँ दुर्गाआरती कीजै हनुमान लला कीपाठ करें →
🐘बुधवार (Wednesday)प्रथम पूज्य श्री गणेश जीजय गणेश जय गणेश देवापाठ करें →
☀️गुरुवार (Thursday)भगवान श्री विष्णु एवं श्री साईं बाबाॐ जय जगदीश हरे / साईं आरतीपाठ करें →
🪷शुक्रवार (Friday)माता महालक्ष्मी एवं माँ संतोषीॐ जय लक्ष्मी मातापाठ करें →
🚩शनिवार (Saturday)श्री हनुमान जी एवं शनि देवश्री हनुमान जी की आरतीपाठ करें →
🏹रविवार (Sunday)भगवान श्री सूर्य देव एवं श्री राम जीश्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन / सूर्य आरतीपाठ करें →

🪔आरती करने के शास्त्रीय नियम एवं विधि (Aarti Niyam)

थाली घुमाने का शास्त्रीय क्रम:

स्कन्द पुराण के अनुसार आरती सदैव दक्षिणावर्त (Clockwise) दिशा में की जाती है:

  • 4 बार भगवान के श्रीचरणों में
  • 2 बार नाभि प्रदेश के सम्मुख
  • 1 बार मुखमंडल के सम्मुख
  • 7 बार भगवान के संपूर्ण श्रीअंगों पर चक्राकार

कुल 14 बार आरती घुमाने का शास्त्रीय विधान है।

आरती के मुख्य समय:

  • मंगला आरती: प्रातः सूर्योदय से पूर्व ब्रह्ममुहूर्त में देव जागरण हेतु।
  • श्रृंगार व मध्याह्न आरती: दोपहर में भगवान को भोग अर्पण के उपरांत।
  • संध्या आरती: गोधूलि वेला में सूर्यास्त के समय घर के मंदिर में दीपक जलाकर।
  • शयन आरती: रात्रि में प्रभु के विश्राम से पूर्व।
🛕सजीव ऑनलाइन गर्भगृह

घर बैठे करें अपने इष्टदेव की सजीव आरती

आरती की थाली दक्षिणावर्त घुमाएं, दिव्य घंटी व शंखनाद करें और पुष्प वर्षा का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

सजीव आरती दर्शन शुरू करें 🪔→