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आरती की थाली घुमाएं, मंदिर की घंटी व शंख बजाएं और पुष्प वर्षा करें।
भगवान श्री सत्यनारायण जी की आरती
"जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥"
जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
रत्न जड़ित सिंहासन, अद्भुत छवि राजे।
नारद करत निराजन, घण्टा ध्वनि बाजे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दरश दियो।
बूढ़ो ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
दुर्बल भील कठौती, काष्ठ धारि आयो।
कथा श्रवण कर उसने, परम धाम पायो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
साधु बनिक विस्मय कर, सन्तति सुख पायो।
सत्यनारायण कृपा से, सब संताप नशायो॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
भाव-भक्ति से जो जन, आरति नित गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय लक्ष्मी रमणा...॥
