"मनवांछित वर एवं समस्त मनोकामना पूर्ति हेतु पावन शिव कथा"
🕒 पठन समय: 12-15 मिनट📅 शुभ दिन: श्रावण मास, वैशाख मास अथवा किसी भी शुक्ल पक्ष के सोमवार🕉️ आराध्य: देवाधिदेव महादेव शिव एवं माता पार्वती
कथा का महात्म्य एवं सार:सोलह सोमवार का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने का सिद्ध मार्ग है। कन्याएं मनचाहा वर पाने के लिए तथा अन्य भक्त जीवन के सभी संकटों से मुक्ति पाने हेतु यह व्रत करते हैं।
सम्पूर्ण कथा के अध्याय (Chapters):
1अमरावती नगरी और शिव-पार्वती का चौपड़ खेल
एक बार भगवान शिव माता पार्वती के साथ अमरावती नगरी के एक भव्य शिव मंदिर में पधारे। वहां दोनों चौपड़ खेलने लगे। माता पार्वती ने मंदिर के पुजारी से पूछा कि किसकी जीत होगी? पुजारी ने शिवजी का नाम लिया, परंतु माता पार्वती जीत गईं। मिथ्या भाषण के कारण माता ने पुजारी को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया।
2अप्सराओं का उपदेश और पुजारी की रोग मुक्ति
कुछ समय बाद देवलोक से अप्सराएं आईं और पुजारी को दुःखी देखकर उन्होंने सोलह सोमवार के व्रत की संपूर्ण विधि बताई। पुजारी ने निष्ठापूर्वक 16 सोमवार का व्रत किया और चूरमे का प्रसाद चढ़ाया। भगवान शिव की कृपा से वह कुष्ठ रोग से पूर्णतः मुक्त होकर स्वस्थ हो गया।
3राजकुमार और राजकुमारी के विवाह का प्रसंग
एक राजा की पुत्री के स्वयंवर में हथिनी ने एक निर्धन युवक के गले में वरमाला डाल दी। राजा ने आश्चर्यचकित होकर पूछा तो युवक ने बताया कि यह सोलह सोमवार व्रत का ही प्रभाव है। कालांतर में राजा के पुत्र ने भी यही व्रत कर परम ऐश्वर्य और राजपाट प्राप्त किया।
🧺 आवश्यक पूजन सामग्री:
✓शुद्ध गाय का घी, गेहूं का आटा, गुड़ या शक्कर (चूरमा प्रसाद)
✓गंगाजल, कच्चा दूध, पंचामृत
✓बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भस्म
✓सफेद चंदन, अक्षत, जनेऊ
🪔 उद्यापन एवं व्रत नियम:
प्रातः स्नान कर शिवलिंग का जलाभिषेक व बेलपत्र अर्पण करें। दिन के तीसरे पहर में गेहूं के आटे के चूरमे के तीन भाग करें: एक भाग भगवान को भोग, दूसरा भक्तों में वितरण, और तीसरा स्वयं ग्रहण करें।