॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ • शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
🪔॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ • सम्पूर्ण आरती संग्रह • ॥ शुभ लाभ ॥

सम्पूर्ण आरती संग्रह (Aarti Sangrah)

अपने इष्टदेव की आरती पर क्लिक करके बड़े अक्षरों में बोल पढ़ें, भावार्थ समझें एवं सजीव दर्शन करें।

🐘बुधवार

श्री गणेश जी की आरती

Ganesh Ji Ki Aarti (Jai Ganesh Deva)

"जय गणेश जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती पिता महादेवा"

🐒मंगलवार एवं शनिवार

श्री हनुमान जी की आरती

Hanuman Ji Ki Aarti (Aarti Kije Hanuman Lala Ki)

"आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की"

🔱सोमवार एवं त्रयोदशी

भगवान शिव जी की आरती

Shiv Ji Ki Aarti (Om Jai Shiv Omkara)

"ॐ जय शिव ओंकारा, हर ॐ शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥"

🪷शुक्रवार एवं दीपावली

माता महालक्ष्मी जी की आरती

Lakshmi Mata Ki Aarti (Om Jai Lakshmi Mata)

"ॐ जय लक्ष्मी माता, तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥"

🏹रविवार एवं रामनवमी

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम जी की आरती

Shri Ram Chandra Kripalu Bhajuman / Shri Ram Aarti

"श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्। नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुख कर कञ्ज पद कञ्जारुणम्॥"

🦚बुधवार, गुरुवार एवं जन्माष्टमी

भगवान श्री कृष्ण जी की आरती

Krishna Ji Ki Aarti (Aarti Kunj Bihari Ki)

"आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरधर कृष्ण मुरारी की। गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला॥"

🦁शुक्रवार, मंगलवार एवं नवरात्रि

माँ दुर्गा / अम्बे जी की आरती

Durga Maa Ki Aarti (Jai Ambe Gauri)

"जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी। तुमको निसदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥"

☀️गुरुवार एवं एकादशी

भगवान श्री जगदीश जी की आरती

Jagdish Ji Ki Aarti (Om Jai Jagdish Hare)

"ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥"

🪕बसंत पंचमी एवं गुरुवार

विद्या दायिनी माँ सरस्वती की आरती

Saraswati Mata Ki Aarti (Om Jai Saraswati Mata)

"जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥"

📜पूर्णिमा एवं गुरुवार

भगवान श्री सत्यनारायण जी की आरती

Satyanarayan Ji Ki Aarti (Jai Lakshmi Ramana)

"जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा। सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥"

🕊️गुरुवार

शिरडी साईं बाबा की आरती

Sai Baba Ki Aarti (Aarti Sai Baba)

"आरती साईं बाबा, सौख्यदातार जीवा। चरण रजातली, द्यावा दासां विसावा॥"

👑एकादशी एवं द्वादशी

खाटू श्याम जी की आरती

Khatu Shyam Ji Ki Aarti (Om Jai Shri Shyam Hare)

"ॐ जय श्री श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे। खाटू धाम विराजे, अनुपम रूप धरे॥"

⚔️शनिवार, मंगलवार एवं अमावस्या

महाकाली माँ की आरती

Kali Mata Ki Aarti (Mangal Ki Seva)

"मंगल की सेवा सुन मेरी देवा, हाथ जोड़ तेरे द्वार खड़े। पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेंट धरे॥"

🌊गंगा दशहरा एवं पूर्णिमा

मोक्षदायिनी माँ गंगा की आरती

Ganga Mata Ki Aarti (Om Jai Gange Mata)

"ॐ जय गङ्गे माता, श्री जय गङ्गे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥"

🕉️रविवार एवं गायत्री जयंती

वेदमाता गायत्री जी की आरती

Gayatri Mata Ki Aarti (Jayati Jayati Gayatri Mata)

"जयति जयति गायत्री माता, जयति जयति गायत्री माता। आदि शक्ति तुम अलख निरंजन, जग पालनकर्ता॥"

☀️रविवार एवं छठ पूजा

भगवान सूर्य देव जी की आरती

Surya Dev Ki Aarti (Jai Kashyap Nandan)

"जय कश्यप नन्दन, ॐ जय अदिति नन्दन। त्रिभुवन तिमिर निकन्दन, भक्त हृदय चन्दन॥"

🛕सजीव ऑनलाइन आरती गर्भगृह • Virtual Mandir Simulator

घर बैठे करें अपने इष्टदेव की सजीव आरती

आरती की थाली घुमाएं, मंदिर की घंटी व शंख बजाएं, और पुष्प वर्षा का पुण्य लाभ प्राप्त करें।

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पावन व्रत कथाएं • Vrat Katha Hub

सम्पूर्ण व्रत कथा संग्रह (Vrat Katha)

शिवजी व्रत कथा, 16 सोमवार, श्री सत्यनारायण भगवान एवं करवा चौथ की प्रामाणिक पौराणिक कथाएं, पूजन विधि व उद्यापन नियम।

शिवजी व्रत कथा
पठन समय: 12 मिनटफाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी-चतुर्दशी, प्रत्येक सोमवार एवं प्रदोष

भगवान शिव जी व्रत कथा (Shivji Vrat Katha)

"महाशिवरात्रि, प्रदोष एवं सोमवार शिव व्रत की प्रामाणिक कथा व अभिषेक विधि"

कथा का सार (Overview):महाशिवरात्रि वह परम पावन रात्रि है जब भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे और माता पार्वती संग उनका पावन विवाह संपन्न हुआ था। इस दिन अनजाने में भी की गई शिव पूजा मोक्षदायिनी सिद्ध होती है।

कथा के अध्याय (Chapters):

चित्रभानु नामक एक शिकारी शिकार की खोज में वन में भटकता रहा। भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह एक जलाशय के किनारे बेल के वृक्ष पर चढ़ गया। वृक्ष के नीचे एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित था, जिससे वह अनभिज्ञ था। शिकार की प्रतीक्षा में वह अनजाने में बेल के पत्ते तोड़कर नीचे गिराता रहा, जो सीधे शिवलिंग पर गिरते गए।

🧺आवश्यक पूजा सामग्री:
  • बेलपत्र
  • धतूरा
  • भांग
  • पंचामृत
  • इत्र
  • भस्म
  • रुद्राक्ष माला
🪔कथा श्रवण व उद्यापन विधि:

महाशिवरात्रि के दिन चारों प्रहर (संध्या, मध्यरात्रि, तृतीय पहर और भोर) में शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद व गंगाजल से रुद्राभिषेक करें और महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करें।

शास्त्रीय पूजन विधि • Pooja Vidhi Guide

पूजा विधि एवं सामग्री सूची (Pooja Vidhi)

घर में नित्य दैनिक पूजा, दीपावली, गणेश चतुर्थी व नवरात्रि पूजा की प्रामाणिक षोडशोपचार विधि एवं चेकलिस्ट।

दैनिक पूजासमय: 15-20 मिनट

घर में नित्य दैनिक पूजा विधि (सरल षोडशोपचार)

सनातन धर्म में प्रतिदिन नित्य पूजा का विधान है। घर के मंदिर में पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठकर शुद्ध मन से पंचदेवों की पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

क्रमशः सरल पूजन विधान (Step-by-Step Rituals):

1
पवित्रीकरण एवं आचमन (Purification & Achaman)

ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः॥

पूजा स्थल पर आसन बिछाएं। बाएं हाथ में जल लेकर दाएं हाथ पर तीन बार आचमन करें (ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः) और चौथे आचमन से हाथ धो लें।

2
दीप प्रज्वलन एवं घंटा-शंख वादन (Lighting Lamp & Bell Ringing)

शुभं करोति कल्याणम् आरोग्यम् धनसंपदाम्। शत्रुबुद्धि विनाशाय दीपज्योति नमोऽस्तुते॥

गाय के शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। मंदिर की घंटी और शंख बजाकर देवताओं का दिव्य आवाहन करें।

3
प्रथम पूज्य गणेश जी का ध्यान (Lord Ganesha Invocation)

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

भगवान गणेश को अक्षत, लाल पुष्प और दूर्वा अर्पित कर समस्त विघ्नों के निवारण की प्रार्थना करें।

4
स्नान एवं जलाभिषेक (Holy Bath & Abhishek)

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु॥

तांबे के पात्र में गंगाजल मिश्रित शुद्ध जल से भगवान की मूर्तियों अथवा शालिग्राम/शिवलिंग पर आचमनी से छींटे दें या स्नान कराएं।

5
वस्त्र, चंदन व अक्षत अर्पण (Tilak & Akshat Offering)

चन्दनस्य महत्पुण्यं पवित्रं पापनाशनम्। आपदां हरते नित्यं लक्ष्मीस्तिष्ठति सर्वदा॥

देवताओं को रोली, पीला चंदन, कुमकुम का तिलक लगाएं और बिना टूटे साबुत चावल (अक्षत) चढ़ाएं।

6
धूप, दीप एवं नैवेद्य (भोग) अर्पण (Incense & Bhog Offering)

ॐ प्राणाय स्वाहा, ॐ अपानाय स्वाहा, ॐ व्यानाय स्वाहा, ॐ उदानाय स्वाहा, ॐ समानाय स्वाहा॥

सुगंधित धूपबत्ती जलाएं। फल, मिश्री, दूध या मिष्ठान्न का भोग तुलसी पत्र (केवल विष्णु जी व गणेश जी को छोड़कर) के साथ अर्पित करें।

7
आरती एवं परिक्रमा (Aarti & Circumambulation)

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥

कपूर अथवा घी की बत्ती की थाली से दक्षिणावर्त (Clockwise) दिशा में आरती घुमाएं। आरती के उपरांत अपने ही स्थान पर तीन बार घूमें।

8
क्षमा याचना एवं शांति पाठ (Kshama Prarthana)

आवाहनं न जानामि न जानामि विसर्जनम्। पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥

हाथ जोड़कर अपनी भूल-चूक के लिए प्रभु से क्षमा मांगें और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करें।

विशेष नियम एवं सावधानियां:
  • ❖पूजा करते समय मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।
  • ❖कभी भी सीधे फर्श पर बैठकर पूजा न करें, हमेशा ऊनी अथवा कुश का आसन बिछाएं।
  • ❖तुलसी के पत्ते कभी भी बासी नहीं माने जाते, परंतु उन्हें एकादशी, रविवार और सूर्यास्त के बाद न तोड़ें।
  • ❖गणेश जी को कभी तुलसी पत्र न चढ़ाएं और शिवजी को कभी केतकी का फूल अथवा कुमकुम न लगाएं।

पूजा सामग्री चेकलिस्ट

आवश्यक सामग्री पर टिक लगाएं

0/15

शुद्ध गाय का घी

Pure Cow Ghee

250g

कपूर (भीमसेनी)

Pure Camphor

50g

रोली / कुमकुम

Roli / Kumkum

1 पैकेट

अक्षत (बिना टूटे चावल)

Unbroken Rice (Akshat)

100g

पीला / सफेद चंदन

Sandalwood Paste

1 डिब्बी

मौली / कलावा (रक्षासूत्र)

Sacred Red Thread

1 रील

गंगाजल

Holy Ganga Jal

1 शीशी

सुपारी (पूजा वाली)

Betel Nuts (Supari)

11 नग

पान के पत्ते

Fresh Betel Leaves

5 पत्ते

सुगंधित धूपबत्ती / अगरबत्ती

Incense Sticks (Dhoop)

1 पैकेट

जनेऊ (यज्ञोपवीत)

Sacred Thread (Janeu)

2 नग

पंचमेवा (काजू, बादाम, किशमिश, छुहारा, मखाना)

Dry Fruits (Panchmeva)

100g

ताजे पुष्प व तुलसी दल

Fresh Flowers & Tulsi

यथाशक्ति

रुई की बत्ती (गोल व लम्बी)

Cotton Wicks (Batti)

1 पैकेट

बताशे / मिश्री

Batasha / Sugar Candy

100g
श्री दुर्गा सप्तशती • Argala Stotram

श्री अर्गला स्तोत्रम् (Argala Stotram)

"दुर्गा सप्तशती का परम फलदायी स्तोत्र: "रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि""

पाठ प्रारूप:
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॥ विनियोगः ॥

ॐ अस्य श्रीअर्गलास्तोत्रमन्त्रस्य विष्णुऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्रीमहालक्ष्मीर्देवता, श्रीजगदम्बाप्रीतये सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः॥

1श्लोक 1

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥

हिन्दी भावार्थ: जयन्ती, मङ्गला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा: इन नामों से प्रसिद्ध जगदम्बिके! आपको मेरा सादर प्रणाम है।

2श्लोक 2

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणी। जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥

हिन्दी भावार्थ: हे देवि चामुण्डे! आपकी जय हो। हे समस्त प्राणियों की पीड़ा हरने वाली! आपकी जय हो। हे सबमें व्याप्त रहने वाली देवि! आपकी जय हो। हे कालरात्रि! आपको मेरा नमस्कार है।

3श्लोक 3

मधुकैटभविद्रावि विधातृवरदे नमः। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: मधु और कैटभ को परास्त करने वाली तथा ब्रह्माजी को वरदान देने वाली हे देवि! आपको नमस्कार है। आप मुझे दिव्य आत्म-स्वरूप दीजिए, विजय दीजिए, यश दीजिए और मेरे काम-क्रोध आदि कामुक शत्रुओं का नाश कीजिए।

4श्लोक 4

महिषासुरनिर्णDefaultाशि भक्तानां सुखदे नमः। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: महिषासुर का संहार करने वाली तथा भक्तों को परम सुख प्रदान करने वाली हे देवि! आपको प्रणाम है। मुझे रूप दीजिए, जय दीजिए, यश दीजिए और शत्रुओं का नाश कीजिए।

5श्लोक 5

रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: रक्तबीज का वध करने वाली और चण्ड-मुण्ड का संहार करने वाली हे देवि! मुझे रूप दीजिए, विजय दीजिए, यश दीजिए और शत्रुओं का शमन कीजिए।

6श्लोक 6

शुम्भस्यैव निशुम्भस्य धूम्राक्षस्य च मर्दिनि। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: शुम्भ, निशुम्भ और धूम्रलोचन का मर्दन करने वाली हे भगवती! मुझे रूप दीजिए, विजय दीजिए, यश दीजिए और काम-क्रोध रूपी शत्रुओं का संहार कीजिए।

7श्लोक 7

वन्दिताङ्घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: सबके द्वारा पूजित चरणों वाली और समस्त सौभाग्य प्रदान करने वाली हे देवि! मुझे रूप दीजिए, जय दीजिए, यश दीजिए और शत्रुओं का नाश कीजिए।

8श्लोक 8

अचिन्त्यरूपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: अचिन्त्य रूप और अद्भुत चरित्र वाली, सब शत्रुओं का नाश करने वाली हे देवि! मुझे आत्म-ज्ञान का रूप दीजिए, विजय दीजिए, यश दीजिए और शत्रुओं का शमन कीजिए।

9श्लोक 9

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: भक्तिपूर्वक नतमस्तक होने वाले भक्तों के पापों को हरने वाली हे चण्डिके! मुझे रूप, विजय, यश प्रदान कर समस्त आंतरिक-बाह्य शत्रुओं का नाश कीजिए।

10श्लोक 10

स्तुवद्भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: भक्तिपूर्वक स्तुति करने वाले भक्तों के समस्त शारीरिक व मानसिक रोगों का नाश करने वाली हे चण्डिके! मुझे रूप दीजिए, जय दीजिए, यश दीजिए और शत्रुओं का नाश कीजिए।

11श्लोक 11

चण्डिके सततं ये त्वामर्चयन्तीह भक्तितः। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: हे चण्डिके! जो लोग इस संसार में निरंतर भक्तिभाव से आपकी अर्चना करते हैं, उन्हें रूप दीजिए, जय दीजिए, यश दीजिए और उनके शत्रुओं का नाश कीजिए।

12श्लोक 12

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: मुझे सौभाग्य और आरोग्य दीजिए। मुझे परम सुख और मोक्ष दीजिए। मुझे रूप दीजिए, जय दीजिए, यश दीजिए और मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए।

13श्लोक 13

विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: मेरे शत्रुओं का नाश कीजिए, मुझे अत्यधिक शारीरिक व आत्मिक बल दीजिए। मुझे रूप दीजिए, जय दीजिए, यश दीजिए और शत्रुओं का नाश कीजिए।

14श्लोक 14

विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: हे देवि! मेरा कल्याण कीजिए। मुझे परम ऐश्वर्य और लक्ष्मी प्रदान कीजिए। मुझे रूप दीजिए, जय दीजिए, यश दीजिए और शत्रुओं का शमन कीजिए।

15श्लोक 15

सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके। रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिन्दी भावार्थ: देवताओं और असुरों के मुकुटों की मणियों से घिसे हुए पावन चरणों वाली हे अम्बिके! मुझे रूप दीजिए, जय दीजिए, यश दीजिए और शत्रुओं का नाश कीजिए।

16श्लोक 16

भार्यां मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥

हिन्दी भावार्थ: हे जगदम्बिके! मुझे मनोनुकूल चलने वाली, सुंदर, उत्तम कुल में उत्पन्न तथा इस दुर्गम संसार-सागर से तारने वाली श्रेष्ठ भार्या (जीवनसंगिनी) प्रदान कीजिए।

17श्लोक 17

इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः। स तु सप्तशतीसंख्यावरमाप्नोति दुर्लभम्॥

हिन्दी भावार्थ: जो मनुष्य इस अर्गला स्तोत्र का पाठ करके दुर्गा सप्तशती महास्तोत्र का पाठ करता है, वह सप्तशती के जप का दुर्लभ और उत्तम फल प्राप्त करता है।

श्री अर्गला स्तोत्र के पाठ का विशेष फल एवं लाभ:

✓सर्वत्र विजय एवं यश की प्राप्ति
✓कठिन से कठिन रोगों एवं असाध्य व्याधियों से मुक्ति
✓शत्रु भय, कोर्ट-कचहरी व तांत्रिक बाधाओं का शमन
✓योग्य जीवनसाथी एवं पारिवारिक सुख-समृद्धि
✓नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती पाठ का संपूर्ण महाफल
वैदिक ज्योतिष एवं मुहूर्त • Parashara Vedic Jyotish

पाराशर ज्योतिष एवं दैनिक शुभ मुहूर्त (Parashara's Light Guide)

महर्षि पराशर विरचित बृहत्पाराशर होराशास्त्र, दैनिक चौघड़िया एवं पूजा-कथा का सटीक शुभ मुहूर्त।

पाराशर ज्योतिष एवं Parashara's Light क्या है? महर्षि पराशर भारतीय वैदिक ज्योतिष के आदि प्रणेता हैं, जिनका ग्रंथ "बृहत्पाराशर होरा शास्त्र" (Brihat Parashara Hora Shastra) सनातन पंचांग और काल गणना का आधार है। विश्व प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर Parashara's Light इसी प्रामाणिक वैदिक पद्धति पर आधारित होकर कुंडली निर्माण, ग्रह दशा, गोचर, तथा पूजा, आरती व व्रत कथाओं के लिए सटीक शुभ मुहूर्त (Shubh Muhurat) निकालने के लिए ज्योतिषाचार्यों द्वारा उपयोग किया जाता है।

* हमारी वेबसाइट पर आप बिना किसी सॉफ्टवेयर डाउनलोड के नित्य आरती, चौघड़िया मुहूर्त और पूजा का समय सीधे देख सकते हैं।

दैनिक चौघड़िया मुहूर्त वर्गीकरण (Pooja Choghadiya Guidelines):

अमृत (Amrit)

सर्वोत्तम

सभी प्रकार के धार्मिक कार्य, पूजा, आरती और व्रत कथा के लिए अत्यंत शुभ

शुभ (Shubh)

उत्तम

नवीन कार्य शुभारंभ, विवाह, गृह प्रवेश एवं देव प्रतिष्ठा

लाभ (Labh)

लाभप्रद

व्यापारिक पूजा, धन प्राप्ति अनुष्ठान एवं श्रीयंत्र पूजन

चर (Char)

सामान्य

यात्रा, वाहन पूजन एवं गतिमान कार्य

उद्वेग (Udveg)

अशुभ

सूर्य का प्रभाव, धार्मिक अनुष्ठान वर्जित

काल (Kaal)

अशुभ

शनि का प्रभाव, संकट कारक, पूजा आरंभ न करें

रोग (Rog)

अशुभ

मंगल का प्रभाव, व्याधि कारक, शुभ कार्य वर्जित

पाराशर पंचांग अनुसार पूजा के 3 स्वर्णिम नियम:

१.अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurat): प्रतिदिन दोपहर लगभग 11:45 से 12:35 बजे का समय भगवान विष्णु और प्रभु श्री राम का परम प्रिय मुहूर्त होता है, जिसमें कोई भी पूजा अथवा कथा तुरंत फलदायी होती है।
२.राहुकाल परिहार (Avoid Rahu Kaal): प्रतिदिन डेढ़ घंटे का समय राहुकाल होता है। राहुकाल में कभी भी नवीन व्रत या पूजा आरंभ नहीं करनी चाहिए (यद्यपि नित्य पूजा व आरती किसी भी समय की जा सकती है)।
३.प्रदोष काल (Pradosh Kaal): सूर्यास्त से 48 मिनट पूर्व और 48 मिनट पश्चात का समय भगवान शिव और माता महालक्ष्मी की आरती व पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
चालीसा संग्रह • Chalisa Sangrah

श्री हनुमान चालीसा एवं शिव चालीसा

गोस्वामी तुलसीदास जी विरचित संपूर्ण 40 चौपाई, दोहा एवं आध्यात्मिक फलश्रुति।

श्री हनुमान चालीसा

रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास जी

॥ दोहा ॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥

बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।

बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

॥ चौपाई ॥

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥

कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥

संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन॥

बिद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥

भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे॥

लाय संजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना॥

जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥

दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥

राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥

सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना॥

आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥

भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥

संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥

और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥

साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥

राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥

अंत काल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥

संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥

जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥

तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

॥ समापन दोहा ॥

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

पाठ का पुण्य फल:

नित्य 1 या 7 बार पाठ करने से भय, भूत-प्रेत बाधा, असाध्य रोग और शनि की साढ़ेसाती दूर होती है। अष्टसिद्धि और नवनिधि का आशीर्वाद मिलता है।

📿डिजिटल साधना • 108 Japa Mala

108 मनकों की डिजिटल जप माला (Japa Mala)

वैदिक मंत्रों का 108 बार सस्वर ध्यान, स्पर्श ध्वनि एवं माला चक्र गणना।

ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

"मैं परमेश्वर शिव, सर्वव्यापी चेतना को नमन करता हूँ।"

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धार्मिक जिज्ञासा एवं समाधान • FAQs

अक्सर पूछे जाने वाले धार्मिक प्रश्न

ऑनलाइन आरती, पूजा विधि, कथा एवं शास्त्रों से जुड़े मुख्य प्रश्नों के शास्त्रीय उत्तर।

ऑनलाइन आरती एक आधुनिक डिजिटल माध्यम है जिसके द्वारा देश-विदेश में रहने वाले श्रद्धालु घर बैठे, यात्रा में या कार्यालय में अपने इष्टदेव की आरती, दर्शन, पुष्प अर्पण, घंटा वादन और शंखनाद कर सकते हैं। सनातन धर्म में "मानसिक पूजा" (Manasik Puja) को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। जब भक्त सच्चे अंतःकरण और पूर्ण श्रद्धा से ऑनलाइन आरती में भाग लेता है, तो उसे प्रत्यक्ष आरती के समान ही मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और ईश्वरीय आशीर्वाद प्राप्त होता है।