॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ • शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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आरती संग्रह • Aarti Sangrahमंगलवार एवं शनिवार

श्री हनुमान जी की आरती

"आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की"

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सजीव दर्शन 🛕

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

जाके बल से गिरिवर कांपै। रोग दोष जाके निकट न झांपै॥

अंजनि पुत्र महा बलदाई। संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारि सीय सुधि लाए॥

लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे॥

लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पताल तोरि जम-कारे। अहिरावण की भुजा उखारे॥

बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर नर मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें॥

कंचन थार कपूर लौ छाई। आरति करत अंजना माई॥

जो हनुमानजी की आरति गावै। बसि बैकुंठ परम पद पावै॥

लंक विध्वंस किए रघुराई। तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥