॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ • शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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आरती संग्रह • Aarti Sangrahसोमवार एवं त्रयोदशी (प्रदोष)

भगवान शिव जी की आरती

"ॐ जय शिव ओंकारा, हर ॐ शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥"

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सजीव दर्शन 🛕

ॐ जय शिव ओंकारा, हर ॐ शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे।

हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी।

त्रिपुरारी कंसारी करमाला धारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अङ्गे।

सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक सङ्गे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूलधारी।

सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।

प्रणवाक्षर के मध्य यह तीनों एका॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

काशी में विश्वनाथ विराजे नन्दी ब्रह्मचारी।

नित उठ दर्शन पावत महिमा अति भारी॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥

त्रिगुणशिवजीकीआरती जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय शिव ओंकारा...॥