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॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥
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॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥ • शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026
महाफल प्रदायक

निर्जला एकादशी व्रत कथा

"वर्ष की चौबीस एकादशियों का संपूर्ण फल देने वाली भीमसेनी एकादशी"

🕒 पठन समय: 10 मिनट📅 शुभ दिन: ज्येष्ठ मास शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि🕉️ आराध्य: भगवान श्री हरि विष्णु
कथा का महात्म्य एवं सार:महाभारत काल में महाबली भीमसेन के लिए महर्षि वेदव्यास जी ने केवल एक निर्जला एकादशी का व्रत करके वर्षभर की 24 एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त करने का विधान बताया था।

सम्पूर्ण कथा के अध्याय (Chapters):

1भीमसेन की व्यथा और महर्षि वेदव्यास का मार्गदर्शन

पांडवों में युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव और द्रौपदी प्रत्येक एकादशी का नियमपूर्वक उपवास करते थे। परंतु महाबली भीमसेन की उदर की अग्नि (वृक) अत्यंत प्रबल थी, जिससे वे भूख सहन नहीं कर पाते थे। उन्होंने व्यास जी से प्रार्थना की कि कोई ऐसा एक व्रत बताएं जिससे बिना बार-बार उपवास किए मोक्ष मिल सके।

2निर्जला व्रत का संकल्प और अपार पुण्य

व्यास जी ने कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक जल की एक बूंद भी ग्रहण न करें। जो मनुष्य इस कठोर नियम का पालन करता है, उसे वर्षभर की सभी एकादशियों का संपूर्ण पुण्य प्राप्त होता है और यमदूत के स्थान पर भगवान विष्णु के पार्षद उसे वैकुंठ ले जाते हैं।

🧺 आवश्यक पूजन सामग्री:

  • ✓जल भरा घड़ा (सुराही)
  • ✓पंखा (व्यजन)
  • ✓खरबूजा, आम
  • ✓अन्न व वस्त्र दान हेतु
  • ✓पीला चंदन व तुलसी दल

🪔 उद्यापन एवं व्रत नियम:

एकादशी के दिन पूर्ण निर्जला उपवास रखें। भगवान विष्णु का "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र से ध्यान करें। द्वादशी को ब्राह्मण को शीतल जल से भरा कलश, पंखा व मौसमी फल दान करने के उपरांत व्रत खोलें।

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